इंदौर। आज जब माता-पिता बच्चों के विकास, व्यवहार और शुरुआती सीखने की क्षमता को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं, ऐसे समय में पीडियाट्रिक रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवा विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। इंदौर के युवा डॉ. चेतन अंजना (OT) इसी दिशा में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
डॉ. चेतन अंजना का मानना है कि किसी बच्चे को केवल उसकी बीमारी या डायग्नोसिस के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। हर बच्चे की क्षमताएं, जरूरतें, व्यवहार, पारिवारिक वातावरण और विकास की गति अलग होती है
इसी सोच के साथ वे बच्चों के लिए व्यक्तिगत और लक्ष्य-आधारित विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (MGM मेडिकल कॉलेज), इंदौर से बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी की शिक्षा पूरी की। इसके बाद MY अस्पताल तथा उससे जुड़े शिक्षण एवं सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में क्लिनिकल प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान उन्हें पीडियाट्रिक रिहैबिलिटेशन के साथ-साथ न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, मनोरोग एवं मल्टीडिसिप्लिनरी रिहैबिलिटेशन के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव मिला।
बच्चों के व्यावसायिक चिकित्सा में विशेष रुचि के चलते डॉ. आँजना ने अपने क्लिनिकल कौशल को और उन्नत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और प्रशिक्षण का मार्ग चुना। उन्होंने अमेरिका के Collaborative for Leadership in Ayres Sensory Integration के माध्यम से सेंसरी Integration® में प्रमाणित प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त SOCH, गुरुग्राम में सेंसरी इंटीग्रेशन के प्रैक्टिकम के माध्यम से अनुभव और प्रशिक्षण हासिल किया।
उनकी विशेषज्ञता केवल थेरेपी तकनीकों तक सीमित नहीं है। बच्चे के विकास को व्यापक रूप से समझने के उद्देश्य से उन्होंने Diploma in Early Childhood Education तथा Diploma in Nutrition and Health Education भी किया। इसके साथ ही Neurodevelopmental Therapy (NDT), Counselling Psychology, बच्चों की काउंसलिंग, Anxiety Disorders, IQ Assessment, Positive Psychiatry और Mental Health जैसे विषयों में भी विशेष प्रशिक्षण एवं अध्ययन किया।
डॉ. आँजना कहते हैं, “थेरेपी में हमारा काम केवल किसी डायग्नोसिस पर काम करना नहीं है। हमारे सामने एक बच्चा और उसका परिवार होता है। असली सफलता तब है जब बच्चा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक स्वतंत्र और सक्षम बन सके।”
उनकी शैक्षणिक यात्रा में उल्लेखनीय उपलब्धि Bachelor of Occupational Therapy Program me में लगातार फर्स्ट रैंक और overall university Topper रहना है। इसके अलावा जयपुर में आयोजित International Conference of Allied Healthcare Professionals में वैज्ञानिक प्रस्तुति के लिए उन्हें Best Paper Award से सम्मानित किया गया।
क्लिनिकल कार्य के साथ-साथ उनका जुड़ाव रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों से भी रहा है। उन्होंने क्लिनिकल साइकोलॉजी, साइको-ऑन्कोलॉजी, पीआईसीयू, एनआईसीयू और सेंसरी इंटीग्रेशन से जुड़े एम्स, नई दिल्ली सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साइंटिफिक पेपर प्रस्तुतियां दी हैं। वे Occupational Therapy और Neurorehabilitation के प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी भाग ले चुके हैं।
डॉ. अंजना के लिए रिसर्च केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि बेहतर क्लिनिकल प्रैक्टिस का आधार है। उनका मानना है कि बच्चों की व्यावहारिक चिकित्सा में लगातार नए वैज्ञानिक प्रमाण सामने आ रहे हैं और एक अच्छे चिकित्सक को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए।
वर्तमान में उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र पीडियाट्रिक न्यूरोरिहेबिलीटेशन है। वे Autism Spectrum Disorder, ADHD, Sensory Processing Difficulties, Developmental Delay, Cerebral Palsy, Behavioural Challenges तथा अन्य न्यूरोडेवलपमेंटल और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक समस्याओं वाले बच्चों के पुनर्वास पर कार्य करते हैं।
उनकी कार्यशैली की खास बात यह है कि वे बच्चे के व्यवहार या कठिनाई को केवल सतही रूप से देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद कारणों को समझने पर जोर देते हैं। थेरेपी के दौरान बच्चे की functional abilities, independence, sensory regulation, learning, participation और दैनिक जीवन की गतिविधियों को महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है। इस प्रक्रिया में माता-पिता को भी बच्चे की थेरेपी का सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जाता है।
विकास संबंधी समस्याओं से गुजर रहे बच्चों के परिवारों के लिए सही समय पर सही मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई बार माता-पिता यह तय नहीं कर पाते कि बच्चे के विकास में दिखाई दे रही किसी कठिनाई के लिए कब विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। ऐसे में जागरूकता, सही मूल्यांकन और समय पर हस्तक्षेप बच्चे की आगे की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
“मेरा उद्देश्य माता-पिता से केवल यह कहना नहीं है कि वे मुझ पर भरोसा करें, बल्कि ऐसा काम करना है कि मेरा ज्ञान, मेरी ईमानदारी और मेरी clinical approach खुद उस भरोसे की वजह बने,” डॉ. आँजना कहते हैं।
