जब हम इस विवशता के दौर से गुजर रहे थे, उन दिनों हमारे पास प्राउड फील करने के लिए सिर्फ एक ही नाम था वह नाम था ‘कपिल देव’।
कपिल देव के साहस ने एक ऐसी प्रेरणा का काम किया था जिसने भारत देश के हर बच्चे के अंदर एक एक ऐसा स्वाभिमान, एक ऐसा कॉन्फिडेंस भर दिया था जिससे कोई असंभव सा दिखने वाला काम भी किया जा सके।
कपिल देव ने जो काम 1983 वर्ल्ड कप में किया वह कई दशकों तक अपने आप में एक मिसाल और अपनी तरह का एकमात्र काम, जिसे हम सभी भारतीयों के अंदर एक अलग तरीके का आत्मविश्वास एक अलग कॉन्फिडेंस एक ऐसी भावना कि हमारे पास कुछ ना होते हुए भी हम सब कुछ कर सकने में संभव है।
उन दिनों जब हमारे पास 1983 के दिनों में भारत के पास मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थी भारतीय टीम के पास भी सुविधाएं नहीं थीं, उसके बावजूद एक अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय टीम ने कपिल देव की अगुवाई में सफलता प्राप्त की और इस सफलता को हमने सदियों तक अपने गले से लगाए रखा और उससे हर दिन प्रेरणा लेते रहे, कि कोई बात नहीं, अगर हमारे पास कुछ नहीं है ,हमारे पास अगर मूलभूत सुविधाएं नहीं है, आधारभूत संरचनायें नहीं है, इसके बावजूद भी हम जीत सकते हैं ।
एक ‘विनिंग डिजायर’ ,जीतने की इच्छा हम सभी के अंदर पैदा हुई । बाद में हमने महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी में T20 वर्ल्ड कप उसके बाद फिर वनडे वर्ल्ड कप, पुनः T20 वर्ल्ड कप रोहित शर्मा की कप्तानी में जीता । लेकिन उस समय में और इस समय में जमीन आसमान का फर्क था । कपिल देव के समय में हमारे पास ना सुविधा थी ना हमारे पास एक अच्छे लेवल की स्पॉन्सरशिप थी । उस समय किसी ने भी यह सपने में भी नहीं सोचा था कि कपिल देव साहब एक ऐसा कारनामा कर देंगे जिसकी मिसाल हम आज 2026 में भी देंगे ।
आज भारत देश एक अलग मुकाम पर है इसके बावजूद हमारे देश की जनता के पास हेल्थ केयर के क्षेत्र में एक ऐसी कमी सामने आती है एक ऐसा गैप जिसका भरा जाना बहुत जरूरी है । यहां अस्पताल तो बहुत हैं, लेकिन ऐसे अस्पताल ना के बराबर है जहां एथिकल, धर्मसंगत, तर्क संगत इलाज होता हो । जहां कोई ऊंच नीच की बात ना हो, जहां कोई गरीब अमीर का अंतर ना हो। जहां अमीरों को भी इलाज मिल सके जिनके पास सब तरीके के साधन है और वहां उन लोगों को भी इलाज मिल सके जिनके पास साधनों की कमी है ।
कपिल देव और सुनील गुप्ता जी दोनों ने मिलकर एक ऐसे संस्थान की स्थापना की है जहां इस सपने को साकार किया जा सके। एक ऐसे संगठन का निर्माण किया है जहां पर हम एक उन्नत चिकित्सा सभी को देने का काम कर सकते हैं। जहां पर एक व्यक्ति आयुष्मान कार्ड के अंदर भी फ्री इलाज पा सकता है।
जिस भावना के साथ जिस ‘विनिंग डिजायर्स के साथ 1983 का वर्ल्ड कप कपिल देव की अगवाई ने भारतीय टीम ने जीता इस प्रकार
इसी प्रकार कपिल देव की अगुवाई में हेल्थ के क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में हम यह मैच खेल रहे हैं जहां आपके डॉ. नवीन सोलंकी को सर्जरी डिपार्टमेंट की कप्तानी का काम मुझे सौंपा गया है ।
कपिल देव साहब ने मिलकर मुझे अपने सपने से अवगत कराया। उन्होंने एक ही बात बार-बार कहीं कि “डॉक्टर साहब मैं मेरा यह सपना है, मैं यह दिल से चाहता हूं कि मेरे यहां से कोई भी मरीज, कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी सामाजिक स्तर का है । यहां से, मेरे अस्पताल से दुखी होकर , भारी मन से वापस न जाए।”
सुनील गुप्ता जी ने कहा “कोई भी मेरे अस्पताल से बिना इलाज वापस न लौटे। एक ऐसा सामाजिक स्वास्थ्य प्रक्रम हम चलायें जिसकी मिसाल सभी लोग दें।”
कपिल देव और सुनील गुप्ता जी के मुंह से ऐसा सुनकर मुझे मालूम पड़ा कि ये तो वही शब्द हैं जो मैं अक्सर अपनी व्याख्यान में बोला करता हूं । यह वही शब्द हैं जो मेरा खुद का ध्येय हैं। एक ऐसी व्यवस्था का हिस्सा बनना, जहां हम एक सर्वव्यापी,सर्वागामी, सामाजिक तथा
एथिकल (नैतिक) जहां जो भी काम किए जाएंगे वह तर्कसंगत होंगे, एविडेंस बेस्ड होंगे और मरीज के हित के अनुसार ही किये जाएंगे।
कपिल देव और सुनील गुप्ता जी के परिवार से जुड़कर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जिस चिकित्सा की साधना का मैंने वर्षों से प्रण लिया , जिस उद्देश्य का श्रम किया ,उसी काम को आगे बढ़ाने का काम मैं यहां कर पाऊंगा ।
मथुरा जिले के गांव नौहझील से निकलकर, मेरे जैसे एक क्रिकेट प्रेमी के लिए , जिसने अपना सारा बचपन क्रिकेट खेल कर बताया है- उस बच्चे के लिए कपिल देव से मिलना, उनसे हाथ मिलाना, उनके साथ खड़े होना ही एक प्राऊड मोमेंट है। उनके साथ हाथ मिलाने की भावना ने ही मुझे इस गर्व और आत्म सम्मान से भर दिया जैसे कि मैंने स्वयं 1983 का वर्ल्ड कप अपने हाथ में उठा लिया हो।
एक छोटे से गांव से निकलकर देश के इतने बड़े प्लेटफार्म तक पहुंचने की मेरी यात्रा में सभी मित्रों , परिवारीजन, गुरुजन, भाई-बंधु, और सबसे जरूरी लाखों मरीज और उनके परिजन जिन्होंने मुझ में विश्वास दिखाया और मुझे दिनों दिन मजबूत बनाया।
यकीन मानिए आज सिर्फ मैं ही नहीं कपिल देव के साथ खड़ा हुआ।
यकीन मानिए,
यकीन मानिए आप सब मेरे साथ यहां खड़े होकर कपिल देव के साथ हाथ मिला रहे थे ।
और आज एक बार फिर मैं आप सभी को यकीन दिलाना चाहता हूं। एक बार फिर आप सभी के सामने संकल्प लेता हूं कि जिस प्रकार पिछले 11 वर्षों से मैंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक साधना की है, हर मरीज को हर व्यक्ति को अपना परिवार जानकर, समझकर ; उसकी पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कर उसे दूर करने का काम किया है ; इसी प्रकार आने वाले वर्षों में भी अपना शत-प्रतिशत देकर मैं सभी स्वास्थ्य सेवाओं को आप सभी तक पहुंचाने में, कपिल देव जी के विजन को आप सभी तक पहुंचाने में कृत-संकल्पित रहूंगा । आप सभी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज्यादा लोगों में शेयर करके सभी तक पहुंचाएं।
बहुत-बहुत धन्यवाद ।
जय हिंद।
आपका
डॉ. नवीन सोलंकी
सीनियर कंसल्टेंट & HOD
Department of General, Laparoscopic, GI & Cancer, LASER & Ano-Rectal Surgery
KDSG Super Speciality Hospital
Greater Noida
Dr.NaveenSolanki
